संघ अनुभवशाला
इंदौर का एक अनुभव केंद्र, जहाँ आगंतुक भारत की कहानी को देखते, समझते और महसूस करते हैं — उसका स्वर्णिम अतीत, संगठित समाज का विचार, और आज हम सबके कर्तव्य। हर यात्रा एक प्रश्न पर पूरी होती है: मैं भारत के लिए क्या करूँगा?
राष्ट्र निर्माण
— डॉ. के. बी. हेडगेवार
आप क्या अनुभव करेंगे
प्राचीन भारत का स्वर्णिम युग
प्राचीन भारत के स्वर्णिम युग पर आधारित फ़िल्म — हमारी सभ्यता का ज्ञान, संस्कृति और आत्मविश्वास।
संघ की स्थापना क्यों हुई
वे परिस्थितियाँ और वह विचार, जिनसे 1925 में संघ की स्थापना हुई।
औपनिवेशिक मानसिकता (गुलामी की सोच)
औपनिवेशिक शासन की छोड़ी हुई सोच — और उससे मुक्त होना क्यों ज़रूरी है।
संघ शाखा
शाखा में क्या होता है — चित्र, फ़िल्म और प्रार्थना “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे”।
प्रार्थना
प्रार्थना — श्लोक दर श्लोक, हिंदी और अंग्रेज़ी में अर्थ सहित।
प्रश्न आपके — उत्तर संघ के
आम जिज्ञासाओं के उत्तर, और शिक्षा, सेवा, श्रम, कृषि, विज्ञान, संस्कृति जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले 27 संघ प्रेरित संगठनों का परिचय।
भारत के लिए मेरा संकल्प
दस विषयों पर कुछ प्रश्न स्वयं से पूछिए, फिर अपने पाँच संकल्प चुनिए और अपना छपा हुआ संकल्प पत्र साथ ले जाइए। यह परीक्षा नहीं, आत्ममंथन है।
उद्घाटन की झलकियाँ
उद्घाटन के दिन संघ अनुभवशाला की एक झलक — इसकी दीर्घाएँ, दीवारों पर लिखी कहानियाँ और वहाँ लिखे गए पहले संकल्प।
हर सदस्य को क्यों जाना चाहिए
राष्ट्र प्रथम की जड़ें समझें
YEF की राष्ट्र प्रथम सोच भारत के अपने मूल्यों से आती है। अनुभवशाला दिखाती है कि ये मूल्य कहाँ से आते हैं।
संगठन की शक्ति देखें
“संगठन में शक्ति है” — देखिए कि सौ वर्षों के संगठित और अनुशासित प्रयास ने समाज को कैसे आकार दिया।
विचार को संकल्प में बदलें
पाँच व्यक्तिगत संकल्प लेकर लौटें — और उन्हें अपने बिज़नेस, परिवार और शहर में जिएँ।
संकल्प वही सार्थक है, जो आचरण में उतरे।
यात्रा की योजना बनाएँ
YEF चैप्टर, सदस्यों और उनके परिवारों के लिए यात्रा की व्यवस्था की जा सकती है। हमें लिखिए, हम योजना बनाने में मदद करेंगे।